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मटेरियल केंद्र

Dokdo, Beautiful Island of Korea

गवाही खाता और तस्वीर

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दोक्दो प्राचीन समय से ही कोरिया का हिस्सा था ।

दोक्दो प्राचीन काल से ही कोरिया के भूक्षेत्र में आता है, आना और जाना बड़े हजारों लट्ठों से बने बेड़े से होता था, मिन्कुक इल्बो (19 मार्च, 1962)

〔अनूदित लेख〕

दोक्दो प्राचीन समय से ही कोरिया का हिस्सा था ।, आना-जाना हजार लट्ठों के बेड़े द्वारा किया जाता था ।

जापान की छाया कभी भी नहीं थी.... वोनसान से लेकर स्सुशिमा तक फैले विशाल समुद्र पर कोरिया का शासन था ।
समुद्र शेरों का शिकार करने के लिए समुद्र पार कर गया ।
90 वर्षीय व्यक्ति की गवाही
ये कहानी पिछले १४० वर्षों से ग्वोमुनदो में सुनायी जाती रही है ।
वृद्ध मछुवारे किम युन-साम का एक पुनर्संकलन

【 योसू】 – यह कई बार बताया जा चुका है कि दोक्दो, पूर्वी समुद्र में उपस्थित द्वीप कोरिया के भू-भाग में आता है । हाल ही में ग्वोमुनदो में रहने वाले एक बूढ़े मछुआरे के पुनर्संकलन से भी कोरिया की दोक्दो पर रही सम्प्रभुता को समर्थन मिलता है । ग्वोमुनदो के निवासी (इन्हें सामदो नाम से भी जाना जाता है) अपनी समुद्री तकनीकों के लिए प्रसिद्ध हैं, जब सभ्यता अविकसित थी, उस समय भी यहाँ के लोग समुद्री व्यापार करते थे । किम ने 19 वर्ष की अवस्था में ही अपनी पहली व्यापार यात्रा छोनसोक (यह 1000 चावल के थैलों को लाद सकता था) में अन्य ग्रामवासियों के साथ बैठ कर शुरू की ।

उन्होंने बेंत से बने पाल नाव पर चढ़ाया और हवा उन्हें पश्चिमी सागर में दायें ओर धकेलने लगी । मौसमी हवाओं के साथ वे जेमुल्पो (वर्तमान का Incheon) की ओर पहुँचे फिर सिनउइजू तक लोग गये जहाँ उन्होंने अपने जहाज को चावल और अनाजों से भर लिया । इसके बाद वे दक्षिण की ओर दक्षिण सागर की तरफ निकले और पूर्वी सागर में वोनसान तक पहुँचे जहाँ उन्होंने घर लौटने से पहले अपने लदे हुये सामान से समुद्री वस्तुओं जैसे पोलाक इत्यादि को खरीदा । वे पूरी तरह से मौसमी हवाओं पर निर्भर थे, इसलिए वे यह नहीं जानते थे कि किस समय वो अपनी मंजिल पर पहुँचेंगे, यदापि हवाएँ हमेशा आती थी । उनमें से 20 लोग पंक्तिबद्ध होकर गाते थे जैसे, “मैं विलाप करता हूँ , हामगियोंग-दो; मैं रोता हूँ , उल्लुंग्दो; पानी के पार खजाने से भरा द्वीप है ....” । अपनी यात्रा के दौरान समुद्री लहरों और तूफानों के कारण वो कई बार मौत के मुँह में जाते जाते बचे ।

1895 की गर्मियों में जब किम 20 साल का था, वह वोनसान के रास्ते 1000 लट्ठों के बेड़े से बने 5 या 6 व्यापारिक जहाजों के साथ वापस आया । उन्होंने द्वीप के घने जंगलों से लकड़ियाँ काटी और उनसे बेड़े बनाये । दिन के समय वह पूर्व की ओर फैले समुद्र के बीचोंबीच स्थित द्वीप को स्पष्ट रूप में देख सकता था । उसने एक पुराने मल्लाह से द्वीप के बारे में पूछा, मल्लाह ने उत्तर दिया कि, “इस द्वीप का नाम दोलसिओम (अथवा सक्दो, दोक्दो का दूसरा नाम) है, और सामदो (ग्वोमुनदो) के समय से गाँव का बूढ़ा किम छी-सोन, 140 वर्ष पहले से ही ग्वोमुनदो गाँव के निवासियों की तरह समुद्री शेरों का शिकार करने के लिए इस द्वीप में आता था ।” (वर्तमान में किम छोल-सु, 57, किम छी-सोन का परपोता, जांगछोन गाँव में रहता है) उसके दल के 10 सदस्यों ने अपने जहाज उल्लुंग्दो में छोड़ दिये, जहाँ उन पर समुद्री वस्तुएँ लादी गई वोनसान में, और दूसरी जगहों में भी सामान लादा गया और कच्चे लकड़ी के लट्ठे दोलसिओम से 79 कि. मी. दूर थे । पूरा द्वीप चट्टानों से ढका हुआ था और किसी भी मानव का नामोनिशान भी मिलना मुश्किल था ।
डोलसिओम दो बड़े और बहुत से छोटे - छोटे द्वीपों से मिलकर बना है । उन्होंने दोनों द्वीपों के बीच में अपना लंगर डाल दिया और वहाँ 10 दिनों तक रूककर समुद्री शेरों और सरसों, एबालोन और दूसरी चट्टानों में मिलनी वाली चीजों को एकत्रित किया । तब उन्होंने इस सामान को उल्लुंग्दो में जाकर उतारा और वहाँ सामान को बेचने के लिए बूसान या स्सुशिमा चले गये, जापानी समुद्री शेरों को बहुत पसंद करते हैं । वे समुद्री शेरों का माँस खाते हैं और खाल से जूते बनाते हैं । उसने कहा कि उसकी दोक्दो की अन्तिम यात्रा 1904 में हुयी थी और तब वह 28 वर्ष का था । वो मुसीबतों का दौर था और वह वापस कभी डोलसिओम नहीं गया, लेकिन आज भी वह उस द्वीप को बड़ी खुशी और उत्साह से याद करता है । वह यह भी जोड़ता है कि किम यून-सिक (35) के सोदो-री में बने मकान में उल्लुंग्दो से उन दिनों लायी गयी चीढ़ की लकड़ी का प्रयोग हुआ है । “हमारे द्वारा पकड़े गये समुद्री शेरों को जापानी लोग अपने धन या अन्य वस्तुओं के बदले में खरीद लेते हैं, और जापानियों को डोलसिओम के बारे में कोई जानकारी नहीं है । हमने डोलसिओम के पास कभी भी किसी जापानी जहाज को नहीं देखा । वो सरासर गलत बोलते हैं जो कहते हैं कि यह जापान के भूक्षेत्र में आता है,” बुढ़े व्यक्ति ने क्रोधित होकर कहा । (किम की तस्वीर)

〔मूल लेख〕

Original Text